Uska Ab Mujhse Man Bhar Gaya Hai Poetry By Kanha Kamboj | The Realistic Dice


About This Poetry :- This beautiful Poetry  'Uska Ab Mujhse Man Bhar Gaya Hai' for The Realistic Dice is performed by Kanha Kamboj and also written by him which is very beautiful a piece.


Uska Ab Mujhse Man Bhar Gaya Hai

ये कैसा ख़्वाब में फन भर गया है
शायद पुराना कोई जख्म भर गया है
आपके आँसू क्यों नहीं रुक रहे
क्या आँखों में आपकी गगन भर गया है
मन भर कर चूमता था वो हमें कभी
अब उसका मुझ से भी मन भर गया है
इस तरह ढाए हैं उसने सितम मुझ पर
ज़ख्म से दिल ही नहीं पूरा बदन भर गया है

अपनी हकीकत में ये एक कहानी करनी पड़ी
उसके जैसी ही मुझे अपनी जुबानी करनी पड़ी
कर तो सकता था बातें इधर उधर की बहुत
मगर कुछ लोगों में बातें हमें खानदानी करनी पड़ी

अपनी आँखों से देखा था मंजर बेवफाई का
गैर से सुना तो फिजूल हैरानी करनी पड़ी
पहले उससे मोहब्बत रूह तलक की मैंने
फिर हरकतें मुझे अपने जिस्मानी करनी पड़ी

एक छाप रह गई थी उसकी मेरे जिस्म पर
अकेले में मिली तो वापिस निशानी करनी पड़ी
हाथ में ताश की गड्डी ले कान्हा को जोकर समझती रही
फिर पत्ते बदल हमें बेईमानी करनी पड़ी
गैर से हंसकर बात कर खूब जलाया हमको
हमें भी फिर किसी का हाथ थाम शैतानी करनी पड़ी

पलकों ने बहुत समझाया, मगर ये आँख नहीं मानी
दिन तो हंसकर गुज़ारा हमने, मगर ये रात नहीं मानी
बिस्तर की सिलवट दे रही थी गवाही गैर की
हमने करवट बदल ली, मगर ये बात नहीं मानी


                                               – Kanha Kamboj