This beautiful poem 'Jab Miloge Tum' which is written and performed by Krishna Singh on the stage of Spill Poetry.


 About This Poetry: 
This beautiful poem 'Jab Miloge Tum' which is written and performed by Krishna Singh on the stage of Spill Poetry.

Jab Miloge Tum

जब मिलोगे तुम मुझसे तो सिर्फ मुझसे नहीं मिलोगे 
तुम उन सब से मिलोगे जिनसे मिलकर मेरे आज ने आकार लिया है 
जो कहीं ना कहीं कभी ना कभी मेरा हिस्सा रहे हैं​
वो कोई भी हो सकता है कक्षा 8 में मन में हुई पहली वो हलचल 
कॉलेज के दिनों में मेरे नाम के साथ जोड़कर लिखा कोई नाम 
या फिर कि मेरी डायरी में लिखी कविताओं का केंद्र 
जब मिलोगे तुम मुझसे तो इन सब से मिलना भी तय है 
क्योंकि मैं किसी को भूलकर आगे नहीं बढ़ी हूं। क्योंकि मैं नहीं समझती कि कुछ भी भूला जा सकता है कभी 
जब मिलोगे तुम मुझसे तो उन सब से 
मिलोगे 
जो मैं आज हूं वो वो भी है जिसके साथ हाईवे नापे है मैंने 
और वो भी जिसे झलक भर देखने को अरसा तरसी हूं 
वो भी जिससे मिलकर जिंदगी गुलजार सी लगी है 
और वो भी जिसने पतझड़ उपहार में दी है 
इनमें से किसी को भी तुम मुझसे अलग नहीं कर सकते 
तुम मुझे अपना कर सकते हो बस 
मगर किसी को किसी से बाहर करने की कोशिश करना बेकार है 
अतीत को भुलाकर नहीं उसे भीतर समा कर स्वीकार कर जिया है मैंने उन सब को 
मुझे इन सब से खाली होने को कहना व्यर्थ है। क्योंकि मुझ में उमड़ते भाव का आधार है ये
किस्से 
और भाव विहिन चेहरा सपाट होगा और शायद फिर तुम्हें मेरी आंखें अच्छी नहीं लगेगी
जब मिलोगे तुम मुझसे तो उनसे भी मिलोगे
जिन्होंने छुअन छुअन का फर्क समझाया है मुझे
 यहां वो भी होगा जिसके छूने से कुमुदिनी सी खिली हूं मैं 
और वो भी जिसके छूने से खुद को मलीन पाया है 
वो भी जिसने मुझसे मेरा मै छीन लिया है 
वो भी जिसने मुझे मुझसे ही मिलवाया है
मैं जानती हूं ये बहुत मुश्किल होगा 
पूर्व प्रेमियों का परिचय अक्सर मतभेद का कारण होता है 
मगर तुम्हें ये समझना जरूरी है 
कि उम्र के हर पड़ाव पर एक नया प्रेम बाहें पसारे आपका इंतजार करता है 
और तुमसे पहले भी कई बार मैंने प्रेम को महसूस किया है 
तुम मुझे सुनोगे कभी मेरी बातों में, कभी मेरे लहजे में, कभी तौर-तरीके में छलक जाएगा कोई
और मैं तुमसे कभी कोई झूठ नहीं कहूंगी
मेरे झूठ जरा भी सच्चे नहीं लगते।

                            – Krishna Singh