This beautiful ghazal 'Wo Pyaar Jiske Liye Humne Kya Ganwa Na Diya' has written by Waseem Barelvi.



 Difficult Word 
तनक़ीद = हिदायत, चेतावनी।

 Source 
लेखक – वसीम बरेलवी
किताब – मेरा क्या
प्रकाशन –  परम्परा प्रकाशन, नई दिल्ली
संस्करण – 2007

Wo Pyaar Jiske Liye Humne Kya Ganwa Na Diya

Wo pyaar jiske liye humne kya ganwa na diya
Usi ne bach ke nikalne ka raasta na diya 

Koi nazar mein raha bhi to is saleeke se 
Ki maine uske hi ghar ka use pata na diya 

Jab ek baar jala li hatheliyaan apni 
Toh phir khuda ne bhi us haath mein diya na diya 

Yah gumrahi ka bhi nashsha ajeeb tha 
Warna gunaahgaar ne rasta, na faasila, na diya 

Zabaan se dil ke sabhi faisle nahin hote 
Use bhulaane ko kahte to the bhula na diya 

'Waseem' uske hi ghar us pe hi tanqeed 
Yahi bahut hai ki usne tumhein utha na diya.

                             – Waseem Barelvi


वो प्यार जिसके लिए हमने क्या गंवा न दिया
(In Hindi)

वो प्यार जिसके लिए हमने क्या गंवा न दिया
उसी ने बच के निकलने का रास्ता न दिया

कोई नज़र में रहा भी तो इस सलीके से
कि मैंने उसके ही घर का उसे पता न दिया

जब एक बार जला लीं हथेलियां अपनी
तो फिर ख़ुदा ने भी उस हाथ में दिया न दिया

यह गुमरही का भी नश्शा अजीब था वरना
गुनाहगार ने रस्ता, न फ़ासिला, न दिया

ज़बां से दिल के सभी फैसले नहीं होते
उसे भुलाने को कहते तो थे भुला न दिया

'वसीम' उसके ही घर उस पे ही तनक़ीद
यही बहुत है कि उसने तुम्हें उठा न दिया।

                                      – वसीम बरेलवी