This beautiful ghazal 'Achha Hai, Jo Mila, Wah Kahi Chhootata Gaya' has written by Waseem Barelvi.


 Source  
लेखक – वसीम बरेलवी
किताब – मेरा क्या
प्रकाशन –  परम्परा प्रकाशन, नई दिल्ली
संस्करण – 2007

Achha Hai, Jo Mila, Wah Kahi Chhootata Gaya 


Achha hai, jo mila, wah kahee chhootata gaya 
Mud-mud ke zindagi ki taraf dekhna gaya

Main, khaali jeb, sab ki nigaahon mein aa gaya 
Sadkon pe bheekh maangane waalo ka kya gaya 

Jaana hi tha, to jaata, use ikhtiyaar tha
Jaate hue yah baat mujhe kyon bata gaya

Kyo mujhme dhoondhata hai wah pahla-sa etabaar 
Jab uski zindagi mein koi aur aa gaya

Usne bhi chhod di mere baare me gufatgu
Kuchh din ke baad main bhi use bhool-sa gaya 

Mele ki raunko mein bahut ghum to ho 'Waseem' 
Ghar lautne ka waqt miyaan sar pe aa gaya.


अच्छा है, जो मिला, वह कही छूटता गया
(In Hindi)

अच्छा है, जो मिला, वह कही छूटता गया 
मुड़-मुड़ के ज़िन्दगी की तरफ देखना गया 

मै, ख़ाली जेब, सब की निगाहों मे आ गया 
सडको पे भीख मांगने वालो का क्या गया 

जाना ही था, तो जाता, उसे इख़्तियार था 
जाते हुए यह बात मुझे क्यों बता गया 

क्यो मुझमें ढूंढता है वह पहला-सा एतबार 
जब उसकी ज़िन्दगी मे कोई और आ गया 

उसने भी छोड दी मेरे बारे मे गुफ़तगू 
कुछ दिन के बाद मैं भी उसे भूल-सा गया 

मेले की रौनको मे बहुत गुम तो हो 'वसीम' 
घर लौटने क वक़्त मियां सर पे आ गया।

                               – Waseem Barelvi