This beautiful ghazal Dua Karo Ki Koi Pyaas has written by Waseem Barelvi.

 Source 
लेखक – वसीम बरेलवी
किताब – मेरा क्या
प्रकाशन –  परम्परा प्रकाशन, नई दिल्ली
संस्करण – 2007


  Difficult Words  
नज़्र-ए-जाम = शराब पीने का विशेष पात्र का उपहार।
ना-तमाम = अपूर्ण।
हयात = जीवन, अस्तित्व ।
आरज़ू-ए-सहर = सुबह की इच्छा।

Dua Karo Ki Koi Pyaas 


Dua karo ki koi pyaas nazr-e-jaam na ho 
Wo Zindagi hi nahin hai jo na-tamaam na ho 

Jo mujh mein tujh mein chala aa raha hai sadiyon se 
Kahin hayaat usi faasle ka naam na ho 

Koi charaag na aansu na aarzoo-e-sahar 
Khuda kare ki kisi ghar mein aisi shaam na ho 

Ajeeb shart lagaai hai ehatiyaaton ne 
Ki tera zikr karoon aur tera naam na ho

Saba-mizaaz ki tezi bhi ek nemat hai 
Agar charaag bujhaana hi ek kaam na ho 

'Waseem' kitni hi subahein lahu lahu guzareen 
Ek aisi subah bhi aaye ki jis ki shaam na ho.


(In Hindi)
दुआ करो कि कोई प्यास नज़्र-ए-जाम न हो 
वो ज़िंदगी ही नहीं है जो ना-तमाम न हो 

जो मुझ में तुझ में चला आ रहा है सदियों से 
कहीं हयात उसी फ़ासले का नाम न हो 

कोई चराग़ न आँसू न आरज़ू-ए-सहर 
ख़ुदा करे कि किसी घर में ऐसी शाम न हो 

अजीब शर्त लगाई है एहतियातों ने 
कि तेरा ज़िक्र करूँ और तेरा नाम न हो

सबा-मिज़ाज की तेज़ी भी एक नेमत है 
अगर चराग़ बुझाना ही एक काम न हो 

'वसीम' कितनी ही सुब्हें लहू लहू गुज़रीं 
इक ऐसी सुब्ह भी आए कि जिस की शाम न हो । 

                                 – Waseem Barelvi