Life Of The Prostitute By Sheetal Kaushik | Poetry | The Social House | Whatashort, Beautiful Poem on prostitute

Description:

Poetry Title – Life Of A Prostitute
Written By – Sheetal Kaushik

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Life Of A Prostitute Poetry

चलो...
चलो आज एक काम करते हैं
छोड़ते हैं सारे काम,
और थोड़ा सा आराम करते हैं
चलते हैं फलक तक नंगे पैर,
और बातों ही बातों में शाम करते हैं....

यू त़ो मैं भी पापा की परी बनकर इस दुनिया में आई थी,
मेरी मां ने भी मेरे लिए लाल चुनरी सजाई थी
लेकिन वक्त को कहां मंजूर था,
और किस्मत खेल खेल गई....
मैं वाकई बहुत बहादुर हूं
जो इतने दुख झेल गई।
जब मां-बाप का दामन छुटा
लेखों ने ऐसी जगह पहुंचा दिया
मिटाने को पेट की भूख
मुझसे मेरा जिस्म हीं बिकवा दिया
और फिर मेरी मजबूरी का बेधड़क फायदा उठाकर
उन वैय्शी दरिंदों ने भरे समाज के सामने मुझे ही चरित्रहीन बता दिया
रात में मुझसे बेहद इश्क जताने वाले
दिन में दूर रहने की हिदायत देते हैं
वेश्या का कोई हक नहीं होता
उसका अस्तित्व कभी सच नहीं होता
भरे समाज में सीना चौड़ा करके कहते हैं –
मेरे पैसे कमाने के तरीके पर सवाल उठाते हैं लेकिन अगर मैं कोई सवाल पूछूं तो सब मौन हो जाते हैं...

मेरे बच्चे का कोई हक नहीं होगा
उसका अस्तित्व कभी सच नहीं होगा
उसी बच्चे के बाप इसी समाज में शरीफ बने रहते हैं
चलो आप ही बता दो क्योंकि आपने भी कभी ना कभी किसी लड़की को वेश्या कहकर बुलाया होगा
या फिर मैं कहती हूं यकीन के साथ,
ऐसी ही कोई गाली देकर उसे रात भर रुलाया होगा
कहां था ये लाचार समाज
जब मुझ 5 साल की बच्ची को बेचा गया
गिराकर जमीन पर, बालों के बल दलदल में फेका गया
तब ना मेरे आंसू देखे ना मेरी चीखें सुन पाए थे
आज लाज शर्म की बातें करते हो
तब ये ज्ञान के सागर कहां छुपाए थे
तब कहां सोए थे जब आपका बेटा
जबरदस्ती मुझसे हम बिस्तर होने आ गया
उसका रूतबा कैसे आज भी वही है
क्या वो वैश्या के हैसियत में नहीं आ गया...
अपनी सहूलियत के अनुसार तुमने सारे नियम-कानून बदल लिए
मालूम भी है तुम्हारे इस अंधे, गूंगे और बहरे समाज ने कितने कत्ल किए
माना पैसे मैं कामाती हूं लेकिन देने तो तुम ही आते हो
हां ठीक है मैं सोती हूं तुम्हारे साथ
वह रात तुम भी तो उसी बिस्तर में बताते हो अपनी बीवी का सोचते नहीं हो और मुझ पर लाखों खर्च कर जाते हो भागीदार तो तुम भी हो
और चरित्रहीन केवल मुझे बताते हो

सच तो ये है की मेरे काम से भी ज्यादा मेरी एक कहानी है,
जो ना कोई सुन पाएगा और ना मुझे बतानी है बस इतना याद रख
मेरा ये चरित्र तेरी ही चित्रकारी का नमुना है
मैं तो बस चेहरा हुं
ये तेरे पुरे समाज का आईना है
ये तेरे पुरे समाज का आईना है....

                                          –Sheetal Kaushik