नए शहर में बरगद | केदारनाथ सिंह 


'नए शहर में बरगद' कविता केदारनाथ सिंह जी द्वारा लिखी गई एक हिन्दी कविता है।

'अकाल में सारस' कविता-संग्रह में‌‌ यह कविता 'नए शहर में बरगद' भी सम्मिलित हैं।

नए शहर में बरगद

जैसे मुझे जानता हो बरसों से
देखो, उस दढ़ियल बरगद को देखो
मुझे देखा
तो कैसे लपका चला आ रहा है
मेरी तरफ

पर अफसोस
कि चाय के लिए
मैं उसे घर नहीं ले जा सकता

                                       – केदारनाथ सिंह


Naye shahar mein bargad
Jaise mujhe jaanta ho barson se
Dekho, us dadhiyal bargad ko dekho
Mujhe dekha
To kaise lapka chala aa raha hai
Meri taraf

Par afsos
Ki chaay ke liye
Main use ghar nahin le ja sakta.

                              – Kedarnath Singh