कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए | केदारनाथ सिंह


'कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए' कविता केदारनाथ सिंह जी द्वारा लिखी गई एक हिन्दी कविता है जिसमें एक किसान अपने बेटे को जीवन जीने का सलीका समझाता है जो कविता में केदार जी द्वारा वर्णित है।

'कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए' कविता में एक किसान अपने बेटे को कई सूत्र देता जैसे कि लाल चींटियों के दिखने पर वर्षा और आंधियों का आगमन, अंधेरे में रास्ता भुलने पर कुत्तों के भौंकने का भरोसा करना ग्रामिण श्रेत्र के लोग कुछ इसी प्रकार पूर्व अनुमान लगाते है और यही किसान बाप अपने बेटे को समझता है और इसी प्रकार की कई नसीहतें अपने बेटे को देता है। 'अकाल में सारस' ऐसे ही कविताओ का कविता-संग्रह है जो कविता 'कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए' पर केंद्रित है।


कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए

मेरे बेटे
कुँए में कभी मत झाँकना
जाना
पर उस ओर कभी मत जाना
जिधर उड़े जा रहें हों
काले-काले कौए

हरा पत्ता
कभी मत तोड़ना
और अगर तोड़ना तो ऐसे
कि पेड़ को जरा भी
न हो पीड़ा

रात को रोटी जब भी तोड़ना
तो पहले सिर झुकाकर
गेहूँ के पौधे को याद कर लेना

अगर कभी लाल चींटियाँ
दिखाई पड़ें
तो समझना
आँधी आने वाली है
अगर कई-कई रातों तक
कभी सुनाई न पड़े स्यारों की आवाज
तो जान लेना
बुरे दिन आने वाले हैं

मेरे बेटे
बिजली की तरह कभी मत गिरना
और कभी गिर भी पड़ो
तो दूब की तरह उठ पड़ने के लिए
हमेशा तैयार रहना

कभी अँधेरे में
अगर भूल जाना रास्ता
तो ध्रुवतारे पर नहीं
सिर्फ दूर से आनेवाली
कुत्तों के भूँकने की आवाज पर
भरोसा करना

मेरे बेटे
बुध को उत्तर कभी मत जाना
न इतवार को पच्छिम

और सबसे बड़ी बात मेरे बेटे
कि लिख चुकने के बाद
इन शब्दों को पोंछकर साफ कर देना

ताकि कल जब सूर्योदय हो
तो तुम्हारी पटिया
रोज की तरह
धुली हुई
स्वच्छ
चमकती रहे

                                       – केदारनाथ सिंह

Mere bete
Kunaye mein kabhi mat jhaankna
jaana
Par us or kabhi mat jaana
Jidhar ude ja rahen ho
Kaale-kaale kauve

Hara patta
Kabhi mat todna
Aur agar todna to aise
Ki ped ko jara bhi
Na ho pida

Raat ko roti jab bhi todna
To pahle sir jhukakar
Gehoon ke paudhe ko yaad kar lena

Agar kabhi laal chintiyaan
Dikhai paden
To samajhna
Aandhi aane waali hai
Agar kayi-kayi raaton tak
Kabhi sunaai na pade syaaron ki aawaj
To jaan lena
Bure din aane wale hain

Mere bete
Bijli ki tarah kabhi mat girna
Aur kabhi gir bhi pado
To doob ki tarah uth padne ke liye
Hamesha taiyaar rahna

Kabhi andhere mein
Agar bhul jaana raasta
To dhruv-taare par nahin
Sirf dur se aanewaali
Kutton ke bhunkne ki aawaj par
Bharosa karna

Mere bete
Budh ko uttar kabhi mat jaana
Na atvaar ko pachchhim

Aur sabse badi baat mere bete
Ki likh chukne ke baad
In shabdon ko ponchhkar saaf kar dena

Taaki kal jab suryodaye ho
To tumhari patiya
Roz ki tarah
Dhuli hui
Swachchh
Chamkti rahe

                                   – Kedarnath Singh