दृश्ययुग-2 | केदारनाथ सिंह 


'दृश्ययुग-2' कविता केदारनाथ सिंह जी द्वारा रचित एक हिन्दी कविता है जो 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ' नामक कविता-संग्रह में संकलित हैं।

'दृश्ययुग-2' कविता केदारनाथ सिंह  जी द्वारा रचित एक हिन्दी कविता  है जो 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ' नामक कविता-संग्रह में संकलित हैं।

दृश्ययुग-2

उसे देखकर
कहना भूल गया
एक बात थी
जो तभी भूल गई थी
जब चला था घर से
और फिर कई दिनों तक याद रहा
वही एक भूलना
जो बाद में पता चला एक चेहरा था
जो न जाने कब
देखने के जल में
चुपचाप घुल गया
और बचा रहा देखना
जिसमें मिलना
छूना
सूँघना
चाहना
सब घुलते गए धीरे-धीरे।

                                       – केदारनाथ सिंह


Use dekhkar
Kahna bhul gaya
Ek baat thi
Jo tabhi bhul gayi thi
Jab chala tha ghar se
Aur phir kayi dinon tak yaad raha
Vahi ek bhulna
Jo baad mein pata chala ek chehra tha
Jo na jaane kab
Dekhne ke jal mein
Chupchaap ghul gaya
Aur bacha raha dekhna
Jisme milna
Chhuna
Sunghna
Chaahna
Sab ghulte gaye dhire-dhire.

                                  – Kedarnath Singh