आँकुसपुर | केदारनाथ सिंह 


'आँकुसपुर' कविता केदारनाथ सिंह जी द्वारा लिखी गई एक हिन्दी कविता है। आँकुसपुर' कविता 'अकाल में सारस' नामक कविता-संग्रह में संकलित एक हिन्दी कविता है।

'आँकुसपुर' कविता 'अकाल में सारस' नामक कविता-संग्रह में संकलित एक हिन्दी कविता है।

आँकुसपुर

आँकुसपुर
रुकी नहीं ट्रेन
हमेशा की तरह धड़धड़ाती हुई आई
और चली गई छोड़कर आँकुसपुर

सिर्फ दसबजिया यहाँ रुकती है
कहा एक यात्री ने
दूसरे यात्री से।

क्यों ?
आखिर क्यों ?
फिर पृथ्वी पर क्यों है आँकुसपुर -
जब रहा नहीं गया
तो तार पर बैठी एक चिड़िया ने पूछा
दूसरी चिड़िया से।


                                             – केदारनाथ सिंह

Aankuspur 
Ruki nahin train
Hamesha ki tarah dhad-dhadaati hui aayi
Aur chali gayi chhodkar aankuspur

Sirf dasbajiya yahan rukti hai
Kaha ek yaatri ne
Dusre yaatri se.

Kyon ?
Aakhir kyon ?
Phir prithvi par kyon hai aankuspur -
Jab raha nahin gaya
To taar par baithi ek chidiya ne puchha
Dusri chidiya se.

                                     – Kedarnath Singh