अंत महज एक मुहावरा है | केदारनाथ सिंह

'अंत महज एक मुहावरा है' कविता केदारनाथ सिंह जी द्वारा लिखी गई एक हिन्दी कविता है। उन्होंने इस कविता में बताया है कि अंत कभी अंत नहीं होता है, अंत का मतलब आरंभ होना है।

अंत महज एक मुहावरा है

अंत में मित्रों,
इतना ही कहूंगा
कि अंत महज एक मुहावरा है
जिसे शब्द हमेशा 
अपने विस्फोट से उड़ा देते हैं
और बचा रहता है हर बार
वही एक कच्चा-सा
आदिम मिट्टी जैसा ताजा आरंभ
जहां से हर चीज
फिर से शुरू हो सकती है।

                                               – केदारनाथ सिंह

Ant mein mitron,
Itna hi kahunga
Ki ant mahaz ek muhawra hai
Jise shabad hamesha 
Apne visfot se uda dete hain
Aur bacha rahta hai har baar
Vahi ek kacha-sa
Aadim mitti jaisa taaza aarambh
Jahan se har chiz
Phir se shuru ho sakti hai.

                                     – Kedarnath Singh