पिछड़ा आदमी | सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

साहित्यकार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने एक कविता लिखी जो समाज की पीढ़ा और भ्रष्ट राजनीति पर आधारित एक हिन्दी कविता है जिसका नाम पिछड़ा आदमी है।


'खूँटियों पर टँगे लोग' सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा लिखी एक काव्य-संग्रह जिनमें सम्मिलित ज्यादातर कविताएं सन् (1976-1981) के मध्य लिखी गयी हैं उनमें से ही एक कविता है ‘पिछड़ा आदमी’. इसमें कवि तत्कालीन समय की राजनीतिक व्यवस्था पर‌ करारा चोट करते हुए कहा हैं कि इस देश की भ्रष्ट शासन प्रणाली में पिछड़ा आदमी हमेशा पीछे ही रह जाता है चाहे वो कोई कार्य हो या कहीं बोलने का काम हो, चलने का काम हो, या फिर खाने का काम ही क्यो ना हो। और जान गँवाने में सबसे पहले वही 'पिछड़ा आदमी' आगे आता है।

'पिछड़ा आदमी'

जब सब बोलते थे
वह चुप रहता था,
जब सब चलते थे
वह पीछे हो जाता था,
जब सब खाने पर टूटते थे
वह अलग बैठा टूँगता रहता था,
जब सब निढाल हो सो जाते थे
वह शून्य में टकटकी लगाए रहता था
लेकिन जब गोली चली
तब सबसे पहले
वही मारा गया।

                                       – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Jab sab bolte the 
Vah chup rahta tha,
Jab sab chalte the
Vah pichhe ho jata tha,
Jab sab khane pe tootate the
Vah alag baitha tungta rehta tha
Jab sab nidhal ho ke so jate the
Vah shunya mein taktaki lagaye rahta tha,
Lekin jab goli chali
Tab sabse pahle
Vahi maara gaya.

                                – Sarveshvar Dayal Saxena