Dil Jalaaya To Anzaam Kya Hua Mera | Rahat Indori


Dil Jalaaya To Anzaam Kya Hua Mera'   written and performed by Rahat Indori. This poetry is best Ghazal and Shayari of Rahat Indori.


शब्द अर्थ
सामईन श्रोताओं, दर्शकों।
क़ाफिया तुक, अंत्यानुप्रास।
मर्सिया मृत व्यक्ति के लिए शोक।
नसब वंशावली, परिवार, वंश, जाति।
हाशिया चादर या सारी आदि के किनारे की गोंट या बेलबूटे, किनारा।


Dil Jalaaya To Anzaam Kya Hua...

दिल जलाया तो अंजाम क्या हुआ मेरा
लिखा है तेज हवाओं ने मर्सिया मेरा

कहीं शरीफ नमाज़ी कहीं फ़रेबी पीर
कबीला मेरा नसब मेरा सिलसिला मेरा

किसी ने जहर कहा है किसी ने शहद कहा
कोई समझ नहीं पाता है जायका मेरा

मैं चाहता था ग़ज़ल आसमान हो जाये
मगर ज़मीन से चिपका है काफ़िया मेरा

मैं पत्थरों की तरह गूंगे सामईन में था
मुझे सुनाते रहे लोग वाकिया मेरा

उसे खबर है कि मैं हर्फ़-हर्फ़ सूरज हूँ
वो शख्स पढ़ता रहा है लिखा हुआ मेरा

जहाँ पे कुछ भी नहीं है वहाँ बहुत कुछ है
ये कायनात तो है खाली हाशिया मेरा

बुलंदियों के सफर में ये ध्यान आता है
ज़मीन देख रही होगी रास्ता मेरा

                                              – राहत इंदौरी

Dil jalaaya to anzaam kya hua mera
Likha hai tez hawaaon ne marsiya mera

Kahin shareef namaazi kahin farebi peer
Kabila mera nasab mera silsila mera

Kisi ne zahar kaha hai kisi ne shahad kaha
Koi samajh nahi paata hai zaayka mera

Main chaahata tha ghazal aasman ho jaaye
Magar zamin se chipka hai kaafiya mera

Main pattharon ki tarah gunge saamyin mein tha
Mujhe sunaate rahe log waakiya mera

Use khabar hai ki main harf-harf sooraj hoon
Wo shkhs padta raha hai likha hua mera

Jahan pe kuch bhi nahi hai wahan bahut kuch hai
Ye kaaynaat to hai khaali haashiya mera

Bulandiyon ke safar me ye dhyaan aata hain
Zameen dekh rahi hogi raasta mera

                                            – Rahat Indori